अहस्तांतरित भूमि के विक्रय पर कार्रवाई नहीं, कब्जा देने की प्रक्रिया पर हो रही बात

इंदौर। परिवार के जीवन यापन के लिए पट्टे पर दी गई जमीन को बेचने का अधिकार नहीं होने के बावजूद चालाकी से उसका विक्रय कर दिया। उपपंजीयक ने खसरा देखें बगैर ही रजिस्ट्री भी कर दी और प्रशासन ने कार्रवाई के बजाय कब्जा दिलाने के लिए नोटिस भी जारी कर दिए हैं। लोगों को परिवार का पालन करने के लिए पट्टे पर दी जाने वाली जमीन पर वह खेती करते आ रहे हैं। इस जमीन का हस्तांतरण और विक्रय नहीं किया जाता है फिर भी पट्टे की जमीन का विक्रय सांठगांठ से आसानी से हो रहा है।
इस तरह के कई मामले पूर्व में भी सामने आ गए हैं किंतु अभी तक जमीन वापस लेने या नियम के अनुसार कार्रवाई करने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है।
कुछ मामलों में जनसुनवाई के दौरान भी शिकायत सामने आई है किंतु उच्च अधिकारियों ने इन मामले में सुनवाई तक नहीं की। इसी तरह का एक मामला हाल ही में प्रकाश में आया जिसमें तहसील खुड़ैल अंतर्गत ग्राम पिवडाय के सर्वे नंबर 1878 पैकि जो शारदा बाई पति रामेश्वर के नाम से दर्ज है।
खसरा नकल में स्पष्ट रूप से अहस्तांतरणीय शब्द दर्ज किया गया है। पट्टे पर दी गई उक्त भूमि का विक्रय सीतालक्ष्मी सिंह पति राजसिंह को कर 2 जून 2023 को उसकी रजिस्ट्री भी कर दी गई। उप पंजीयक कार्यालय इंदौर 2 में हुए इस जमीन के दस्तावेज के पंजीयन के समय उप पंजीयक श्याम शुक्ला ने आनलाइन खसरा देखना उचित नहीं समझा।
वर्तमान खसरा नकल में जमीन के विक्रय का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। अचरज की बात तो यह है कि खसरे में यह जानकारी दर्ज हो गई किंतु अभी तक पटवारी और तहसीलदार को इसकी भनक तक नहीं लगी।
फार्मर रजिस्ट्री और केवाईसी के दौरान पटवारी और तहसीलदार प्रत्येक किसान की जमीन को लेकर जानकारी संग्रहित कर उसमें आधार सामग्र से केवाईसी का काम करते आ रहे हैं उसके बावजूद उन्हें पट्टे की जमीन पर हुए विक्रय की जानकारी नजर ही नहीं आई।
जमीन के विक्रय को लेकर पटवारी और तहसीलदार ने कार्रवाई करना तो दूर उल्टे विक्रय के बाद इस जमीन का कब्जा दिलाने के लिए तैयारी भी शुरू कर ली है मामले में 60 गार्डन से कब्जा दिलाने के लिए दल तैयार भी हो गया था।
अचानक सामने आई शिकायत के बाद यह काम अभी टलता नजर आ रहा है।
सर्विस प्रोवाइडर और भूमाफियाओं की मिली भगत खसरा नकल में आई सामने —
अहस्तांतरणीय शब्द खसरे पर दर्ज होने के बाद उसका विक्रय या विक्रय के बाद पंजीयन असंभव है। इस बात की जानकारी होने के चलते भू माफिया ने यह जमीन चालाकी दिखाकर बेचीं और रजिस्ट्री करवाई।
इस कार्य में सर्विस प्रोवाइडर ओमेरा बी की भूमिका भी प्रमुख रही है। उक्त जमीन के दस्तावेज पंजीयन के समय जो खसरा नकल और नक्शा प्रस्तुत किया गया है उसमें से अहस्तांतरणीय शब्द को हटाया गया स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।